जानिए कैसा रहेगा आपका जीवन।
अपने जीवन की भविष्यवाणियां पढ़ें।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2021

ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री
जय माता दी...हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व होता है.इस नवरात्रि में तांत्रिक और सात्विक दोनों प्रकार की पूजा की जाती है.पंचांग के अनुसार हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि शुरू होती है.वर्ष 2021 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 11 जुलाई दिन रविवार से शुरू होगी,जो कि 18 जुलाई 2021 दिन रविवार को समाप्त होगी.गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के साथ तांत्रिक 10 महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए पूजा की जाती है.!

तांत्रिक पूजा के लिए गुप्त नवरात्रियों का महत्व चैत्र और शारदीय नवरात्रियों से अधिक होता है. इन गुप्त नवरात्रियों में भी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का, तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना आदि के लिए विशेष महत्व होता है. गुप्त नवरात्रि में व्यक्ति 10 महाविद्याओं का ध्यान-साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करता है.ऐसी मान्यता है कि तंत्र मंत्र की सिद्धि के लिए इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है. इस नवरात्रि में साधक मां आदिशक्ति की दस महाविद्याओं की पूजा गुप्त रूप से करते हैं. मान्यता है कि इस समय विधि-विधान से की गई पूजा से मां दुर्गा की ये दस महाविद्याएं साधक को कार्य सिद्धि प्रदान करती हैं.!

गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक तांत्रिक और अघोरी मां दुर्गा की आधी रात में पूजा करते हैं.इसमें स्नानादि करके घर में गुप्त स्थान पर मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित कर लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी चढ़ाते हैं,इसके बाद मां के चरणों में पूजा सामग्री के साथ-साथ लाल पुष्प चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है,मां के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाकर 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें,उसके बाद आरती आदि करके पूजा समाप्त करें.!

-:'गुप्त नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त':-
आषाढ़ घट स्थापना: 11 जुलाई 2021 रविवार को
घट स्थापना शुभ मुहूर्त – सुबह 05:35 से सुबह 07:48
अभिजित मुहूर्त – सुबह 12:01 से दोपहर 12:49
प्रतिपदा तिथि शुरु – 10 जुलाई 2021 को सुबह 06:46 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्ति – 11 जुलाई 2021 को सुबह 07:48 बजे से

-:'वर्ष में चार बार आती हैं नवरात्रि':-
शक्ति की साधना के लिए नवरात्रि के नौ दिन बहुत अहम माने गये हैं,माता को समर्पित नवरात्रि एक साल में चार बार आती है..!
1. चैत्र नवरात्रि अथवा बासंतीय नवरात्रि
2. आषाढ़ अथवा वर्षाकालीन नवरात्रि
3. आश्विन नवरात्रि अथवा शारदीय नवरात्रि
4. माघ नवरात्रिअथवा शिशिर नवरात्रि

प्रत्येक ऋतु में पड़ने वाली नवरात्रि में शक्ति की पूजा का नौ दिन की विशेष पूजा का विधान है,इन सभी चारों नवरात्रों को दो वर्गों में बांटा गया है,जिनमें से चैत्र एवं अश्विन नवरात्रि प्रकट नवरात्रि होते हैं, जबकि आषाढ़ एवं माघ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है.!

गुप्त नवरात्रि में शक्ति की साधना करने के लिए सूर्योदय से पहले उठें और स्नान-ध्यान करने के पश्चात् शुद्ध मन से माता की साधना का संकल्प करें,माता की सभी पूजन सामग्री लेकर विधि-विधान से कलश स्थापित करें और मिट्टी के पात्र में जौ के बीज बोएं,जिसे प्रतिदिन शुद्ध जल से सींचते रहें,गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों तक सच्चे मन से साधना करने के पश्चात् अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें हलवा-पूड़ी खिलाएं,इसके पश्चात् गुप्त नवरात्रि के आखिर दिन विधि-विधान से माता को विदा करें.!

नोट :- अपनी पत्रिका से सम्वन्धित विस्तृत जानकारी अथवा ज्योतिष,अंकज्योतिष,हस्तरेखा,वास्तु एवं याज्ञिक कर्म हेतु सम्पर्क करें...!