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गणेश चतुर्थी/सिद्धिविनायक व्रत विशेषाङ्क

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ॥

ॐ गँ गणपतये नमो नमः....प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन 10 दिवसीय गणेशोत्सव पर्व मनाया जाता है,यह दिन श्री गणेश चतुर्थी के नाम से प्रचलित है,इस दिन श्री गणेश जी की प्रतिमा घर लाने और 10 दिनों तक उनका विधि-विधान से पूजन करने की परंपरा है,इस वर्ष 10 सितंबर 2021, शुक्रवार को यह पर्व मनाया जा रहा है,इस दिन चित्रा नक्षत्र रहेगा और ब्रह्म योग रहेगा.!

चतुर्थी तिथि का प्रारंभ गुरुवार 09/10 सितंबर 2021 को रात 00:24 से होकर शुक्रवार,10 सितंबर 2021 रात्रि 21:58 बजे तक चतुर्थी तिथि रहेगी,इस दिन पाताल लोक की भद्रा रहेगी, जिसका समय सुबह 11:08 मिनट से रात 09:57 मिनट तक होगा,वैसे तो भद्रा काल को शुभ कार्य के लिए अशुभ माना जाता है, किंतु श्री गणेश का एक अन्य नाम विघ्नविनाशक भी है,अत: भद्रा की वजह से गणेश स्थापना प्रभावित नहीं होगी..!


इस बार श्री गणेश जी की स्थापना चित्रा नक्षत्र के ब्रह्म योग में होगी और चित्रा नक्षत्र दोपहर 12:58 मिनट तक रहेगा,उसके बाद स्वाती नक्षत्र प्रारंभ होगा। इस दिन रवि योग भी रहेगा,जिसका समय सुबह 6:01 मिनट से लेकर दोपहर 12:58 मिनट तक रहेगा,यह संयोग सुख-समृद्धि और सौभाग्य देने वाला साबित होगा..!

-:'कलंक चौथ कथा':-
द्वारिकापुरी में सत्राजित नाम का एक सूर्यभक्त निवास करता था उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उसे एक अमूल्य मणि प्रदान की. मणि के प्रभाव स्वरुप किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता है और राज्य आपदाओं से मुक्त हो जाता है. एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने राजा उग्रसेन को उक्त मणि प्रदान करने की बात सोची. परंतु सत्राजित इस बात को जान जाता है. इस कारण वह मणि अपने भाई प्रसेन को दे देता है.!

परंतु एक बार जब प्रसेन वन में शिकार के लिए जाता है तो वहां सिंह के द्वारा मृत्यु को प्राप्त होता है और सिंह के मुंह में मणि देख कर जांबवंत शेर को मारकर वह मणि पा लेता है, प्रजा को जब जांबवंत के पास उस मणि होने की बात का पता चलता है तो वह इसके लिए कृष्ण को प्रसेन को मारकर मणि लेने की बात करने लगते हैं. इस आरोप का पता जब श्रीकृष्ण को लगता है तो वह बहुत दुखी होते हैं और प्रसेन को ढूंढने के लिए निकल पड़ते हैं.!

घने वन में उन्हें प्रसेन के मृत शरीर के पास में सिंह एवं जाम्बवंत के पैरों के निशान दिखाई पड़ते हैं. वह जाम्बवंत के पास पहुँच कर उससे मणि उसके पास होने का कारण पूछते हैं तब जांबवंत उन्हें सारे घटना क्रम की जानकारी देता है. जाम्बवंत अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह श्रीकृष्ण से कर देता है और उन्हें स्यमंतक मणि प्रदान करता है.!

प्रजा को जब सत्य का पता चलता है तो वह श्री कृष्ण से क्षमा याचना करती है. यद्यपि यह कलंक मिथ्या सिद्ध होता है परन्तु इस दिन चांद के दर्शन करने से भगवान श्री कृष्ण को भी मणि चोरी का कलंक लगा था और श्रीकृष्ण जी को अपमान का भागी बनना पड़्ता है.!

-:'गणेश चतुर्थी पूजन':-
भाद्रपद्र शुक्ल की चतुर्थी ही गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी कि विशेष पूजा अर्चना की जाती है. भाद्रपद्र कृष्ण चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था इस कारण यह तिथि और भी विशेष बन जाती है.इस दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है, गणेश जी की इस मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाकर षोड्शोपचार से पूजन किया जाता है. तथा लडडुओं का भोग लगाया जाता है.संध्या समय पूजन करके चंद्रमा देखे बिना अर्ध्य देना चाहिए.!

-:'चतुर्थी पूजन महत्व':-
चंद्रमा को देखे बिना अर्ध्य देने का तात्पर्य है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति कलंक का भागी बनता है. क्योंकि एक बार चंद्रमा ने गणेश जी का मुख देखकर उनका मजाक उड़ाया था इस पर क्रोधित होकर गणेश जी ने चंद्रमा को श्राप दे दिया कि, आज से जो भी तुम्हें देखेगा उसे झूठे अपमान का भागीदार बनना पडे़गा परंतु चंद्रमा के क्षमा याचना करने पर भगवान उन्हें श्राप मुक्त करते हुए कहते हैं कि वर्ष भर में एक दिन भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी को चंद्र दर्शन से कलंक लगने का विधान बना रहेगा.!

व्रत से सभी संकट-विघ्न दूर होते हैं. चतुर्थी का संयोग गणेश जी की उपासना में अत्यन्त शुभ एवं सिद्धिदायक होता है. चतुर्थी का माहात्म्य यह है कि इस दिन विधिवत् व्रत करने से श्रीगणेश तत्काल प्रसन्न हो जाते हैं. चतुर्थी का व्रत विधिवत करने से व्रत का सम्पूर्ण पुण्य प्राप्त हो जाता है.!

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