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मोहिनी एकादशी 2021

ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री
नमो नारायण.....वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी मोहिनी एकादशी कहलाती है. इस दिन भगवान पुरुषोतम राम की पूजा करने का विधि-विधान है. व्रत के दिन भगवान की प्रतिमा को स्नानादि से शुद्ध कर श्वेत वस्त्र पहनाये जाते है. वर्ष 2021 में 22/23 मई के दिन मोहिनी एकादशी का व्रत किया जायेगा. व्रत के दिन उच्चासन पर बैठकर धूप, दीप से आरती उतारते हुए, मीठे फलों से भोग लगाना चाहिए.!

-:'मोहिनी एकादशी व्रत विधि':-
मोहिनी एकादशी व्रत जिस व्यक्ति को करना हों,उस व्यक्ति को व्रत के एक दिन पूर्व ही अर्थात दशमी तिथि के दिन रात्रि का भोजन कांसे के बर्तन में नहीं करना चाहिए.दशमी तिथि में भी व्रत दिन रखे जाने वाले नियमों का पालन करना चाहिए.जैसे इस रात्रि में एक बार भोजन करने के पश्चात दूबारा भोजन नहीं करना चाहिए.रात्रि के भोजन में भी प्याज और मांस आदि नहीं खाने चाहिएं.इसके अतिरिक्त जौ,गेहुं और चने आदि का भोजन भी सात्विक भोजन की श्रेणी में नहीं आता है..!

एकादशी व्रत की अवधि लम्बी होने के कारण मानसिक रुप से तैयार रहना जरूरी है.इसके अलावा व्रत के एक दिन पूर्व से ही भूमि पर शयन करना प्रारम्भ कर देना चाहिए.तथा दशमी तिथि के दिन भी असत्य बोलने और किसी को दु:ख देने से बचना चाहिए.इस प्रकार व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि की रात्रि से ही करना आवश्यक है.!

व्रत के दिन एकादशी तिथि में उपवासक को प्रात:काल में सूर्योदय से पहले उठना चाहिए.और प्रात:काल में ही नित्यक्रियाएं कर, शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए.स्नान के लिये किसी पवित्र नदी या सरोवर का जल मिलना श्रेष्ठ होता है.अगर यह संभव न हों तो घर में ही जल से स्नान कर लेना चाहिए. स्नान करने के लिये कुशा और तिल एक लेप का प्रयोग करना चाहिए.शास्त्रों के अनुसार यह माना जाता है, कि इन वस्तुओं का प्रयोग करने से व्यक्ति पूजा करने योग्य होता है.!

स्नान करने के बाद साफ -शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए.और भगवान श्री विष्णु जी के साथ-साथ भगवान श्री राम की पूजा की जाती है.व्रत का संकल्प लेने के बाद ही इस व्रत को शुरु किया जाता है. संकल्प लेने के लिये इन दोनों देवों के समक्ष संकल्प लिया जाता है.!

देवों का पूजन करने के लिये कुम्भ स्थापना कर उसके ऊपर लाल रंग का वस्त्र बांध कर पहले कुम्भ का पूजन किया जाता है,इसके बाद इसके ऊपर भगवान कि तस्वीर या प्रतिमा रखी जाती है.प्रतिमा रखने के बाद भगवान का धूप, दीप और फूलों से पूजन किया जाता है.तत्पश्चात व्रत की कथा सुनी जाती है.!

-:'मोहिनी एकादशी व्रत कथा':-
सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नाम की एक नगरी थी.इस नगरी में घृ्त नाम का राजा रहता था. उसके राज्य में एक धनवान वैश्य रहता था.वह बडा धर्मात्मा और विष्णु का भक्त था.उसके पांच पुत्र थे. बडा पुत्र महापापी था,जुआ खेलना,मद्धपान करना और सभी बुरे कार्य करता था.उसके माता-पिता ने उसे कुछ धन देकर घर से निकाल दिया.!

माता-पिता से उसे जो मिला था,वह शीघ्र ही समाप्त हो गया.इसके बाद जीवनयापन के लिए उसने चोरी आदि करनी शुरु कर दी.चोरी करते हुए पकडा गया.दण्ड अवधि बीतने पर उसे नगरी से निकाल दिया गया.एक दिन उसके हाथ शिकार न लगा.भूखा प्यासा वह एक मुनि के आश्रम में गया.और हाथ जोडकर बोला,मैं आपकी शरण में हूँ,मुझे कोई उपाय बतायें,इससे मेरा उद्वार होगा.!

उसकी विनती सुनकर मुनि ने कहा की तुम वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन व्रत करों अनन्त जन्मों के पापों से तुम्हे मुक्ति मिलेगी मुनि के कहे अनुसार उसने मोहिनी एकादशी व्रत किया ओर पाप मुक्त होकर वह विष्णु लोक चला गया..!

-:'मोहिनी एकादशी व्रत का महत्व':-
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि में जो व्रत होता है.वह मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है.इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य़ मोह जाल से छूट जाता है.तथा व्यक्ति के सभी पाप और दु:ख नष्ट होते है.अत: इस व्रत को सभी दु:खी मनुष्यों को अवश्य करना चाहिए.मोहिनी एकादशी के व्रत के दिन इस व्रत की कथा अवश्य सुननी चाहिए.!

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