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रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त

ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री
ॐ यदाबध्नन्दाक्षायणा हिरण्यं,शतानीकाय सुमनस्यमाना:.!
तन्मSआबध्नामि शतशारदाय, आयुष्मांजरदृष्टिर्यथासम्।।
नमो नारायण....... हाथ की कलाई पर बांधा जाने वाला रक्षासूत्र मात्र एक धागा नहीं बल्कि शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का पवित्र बंधन होता हैं,यदि इस पवित्र सूत्र तो शुद्ध अंतःकरण एवं शृद्धा से तथा भगवन्नाम व भगवद्भाव सहित शुभ संकल्प करके बाँधा जाता है तो इसका सामर्थ्य असीम हो जाता है.हमारे यहां हर साल श्रावणी-पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है,इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा-सूत्र बांधती हैं,रक्षा बंधन का त्यौहार भाई बहन के प्रेम का प्रतीक होकर चारों ओर अपनी छटा को बिखेरता सा प्रतीत होता है.सात्विक एवं पवित्रता का सौंदर्य लिए यह त्यौहार सभी जन के हृदय को अपनी खुश्बू से महकाता है. इतना पवित्र पर्व यदि शुभ मुहूर्त में किया जाए तो इसकी शुभता और भी अधिक बढ़ जाती है.!


-:'राखी में भद्रा का महत्व':-
धर्म ग्रंथों में सभी त्यौहार एवं उत्सवों को मनाने के लिए कुछ विशेष समय का निर्धारण किया गया है जिन्हें शुभ मुहूर्त समय कहा जाता है,इन शुभ समय पर मनाए जाने पर त्यौहार में शुभता आती है तथा अनिष्ट का भाव भी नही रहता.इसी प्रकार रक्षा का बंधन के शुभ मुहूर्त का समय भी शास्त्रों में निहित है, शास्त्रों के अनुसार भद्रा समय में श्रावणी और फाल्गुणी दोनों ही नक्षत्र समय अवधि में राक्षा बंधन नहीं करना चाहिए. इस समय राखी बांधने का कार्य करना मना है और त्याज्य होता है. मान्यता के अनुसार श्रावण नक्षत्र में राजा अथवा फाल्गुणी नक्षत्र में राखी बांधने से प्रजा का अहित होता है. इसी का कारण है कि राखी बांधते समय, समय की शुभता का विशेष रुप से ध्यान रखा जाता है.!

-:'राखी बांधने का शुभ मुहूर्त':-
इस वर्ष 2021 में रक्षा बंधन का त्यौहार 22 अगस्त को मनाया जाएगा.पूर्णिमा तिथि शनिवार 21 अगस्त को सायंकालीन 19 बजकर 01 मिनट से आरम्भ होगी तथा रविवार 22 अगस्त 17 बजकर 32 मिनट तक व्याप्त रहेगी.इस वर्ष भद्रा प्रात: 06 बजकर 17 मिनट पर समाप्त हो जायेगी इस समय के उपरांत रक्षाबंधन {श्रावणी उपकर्म} संपन्न किया जाएगा.!

रक्षा सूत्र बाँधने {धारण करने/करवाने} का समय मुहूर्त प्रातः 06:18 से 16:21.तक शुभ मुहूर्त हैं, अपितु मध्याहन अभिजीत मुहूर्त में 12:01 से 12:51.तक विशेष मंगलकारी रहेगा .!

रक्षा के सूत्र के लिए उचित मुहूर्त्त का इंतजार सभी की चाह है पर सबसे खास बात है राखी के सा

थ कुमकुम रोलौ, हल्दी, चावल, दीपक, अगरबती, मिठाई का उपयोग किया जाता है. कुमकुम हल्दी से भाई का टीका करके चावल का टीका लगाया जाता है और भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है.! अन्य त्यौहारों की तरह इस त्यौहार पर भी उपहार और पकवान अपना विशेष महत्व रखते है.इस दिन पुरोहित तथा आचार्य सुबह सुबह अपने यजमानों के घर पहुंचकर उन्हें राखी बांधते है, और बदले में धन वस्त्र, दक्षिणा स्वीकार करते है. राखी बांधते समय बहनें निम्न मंत्र का उच्चारण करें, इससे भाईयों की आयु में वृ्द्धि होती है.!

"येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:I
तेन त्वांमनुबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल II"


रक्षा बंधन का पर्व जिस व्यक्ति को मनाना है, उसे उस दिन प्रात: काल में स्नान आदि कार्यों से निवृ्त होकर, शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए. इसके बाद अपने इष्ट देव की पूजा करने के बाद राखी की भी पूजा करें साथ ही पितृरों को याद करें व अपने बडों का आशिर्वाद ग्रहण करें.!

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