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वास्तु टिप्स

वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा का स्वामी मंगल होता है एवं मंगल लाल रंग का प्रतीक होता है,साथ ही दक्षिण दिशा से मान सम्मान (नेम एन्ड फेम ) का विचार किया जाता है,इसलिए घर मे मान सम्मान की ऊर्जा को एक्टिव करने के लिए आफिस ,दुकान या ड्राइंग कक्ष के दक्षिण दीवाल को लाल रंग से रंगना अत्यंत लाभकारी होता है.!
वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन के पश्चिम/दक्षिण दिशा अथवा वायव्य कोण में बने शौचालय उत्तम होते हैं,अपितु इन शौचालयों को सदैव स्वच्छ रखें,अन्यथा इनकी निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा घर मे विचरण करते हुए वास्तु दोष को उत्पन्न करती है.!
आग्नेय कोण में ट्रांसफार्मर,जनरेटर,भट्टी,चिमनी एवं पेंट्री लगाना/रखना लाभ प्रद रहता हैं,यदि आग्नेय कोण में अग्नितत्व से सम्बंधित वस्तुएं रख दी जायें तो आग्नेय कोण सहित पुरे माकन में पंचतत्व का संतुलन स्थापित हो जाता है,आग्नेय कोण से सभी जीवों को शारीरिक ऊर्जा प्राप्त होती है.!
वास्तु के अनुसार आग्नेय कोण {SE} में पति पत्नी का शयन कक्ष होने से अक्सर दोनों के मध्य वादविवाद/लड़ाई-झगड़े की सम्भावना बनी रहती है,तथा इस कोण में सोने वाले ब्यक्ति मदिरा,धूम्रपान,हुक्का आदि दुर्व्यसनों का शौकीन भी होता हैं.!
सनातन परम्परा के अनुसार रसोईघर में माँ अन्नपूर्णा का वास होता है,अतैव सरोईघर की न केवल पवित्रता अपितु सही दिशा में होना आवश्यक होता है,वास्तु शास्त्र की दृष्टि से मकान में रसोईघर दक्षिण-पूर्व दिशा {आग्नेय कोण} में होना विशेष शुभ होता है.
यदि आप घर/ऑफिस/फेक्ट्री की टेबल के उपर बांस का पौधा {Bamboo Tree} रखते है,तो इस पौधे को आग्नेय कोण या दक्षिण दिशा में रखना चाहिये,क्यूंकि लकड़ी अग्नितत्व को आकर्षित करती हैं इस लिए आग्नेय कोण या दक्षिण में रखी जाती है.